वैश्विक सुगम्यता जागरूकता दिवस

सन 2012 में वैश्विक सुगम्यता दिवस को मनाने की शुरूआत आम लोगों को सुगम्यता के बारे में बताने और जागरूक करने के उद्देश्य से हुई। इसके पीछे की रोचक कहानी यह है कि इसकी शुरूआत मात्र एक छोटे से ब्लॉग पोस्ट से हुई, जो आगे चलकर एक वैश्विक मुहिम बन गया।
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आसान उपलब्धता हेतु दिव्यांगों और आम जनता को जागरूक करना;  स्रोत: Pxfuel

वैश्विक सुगम्यता जागरूकता दिवस, सरल भाषा में सुगम्यता को समझाया जाए, आम जनता को वेब की आसानी से उपलब्धता के बारे में जागरूक करना है। ज्यादा से ज्यादा लोगों जिसमें दुनिया के 1.2 बिलियन वे जन भी शामिल हैं, जो किसी तरह की शारीरिक अथवा मानसिक अस्वस्थता का दंश झेल रहे हैं, को इंटरनेट पर अपनी उपबल्धता को सरल और सुगम्य बनाने के लिए प्रोत्साहित करना। यह दिवस डिजिटल पहुँच पर ध्यान केन्द्रित करने हेतु डेवलेपर्स, डिज़ाइनरों और अन्य रचनाकारों की ओर लाक्षित है।

आज के दौर में इंटरनेट ने हजारों लाखों क्षेत्रफल में फैले दुनिया भर के लोगों की आपस में संपर्क कर पाने की दुविधा को चुटकियों में हल कर दिया है।  आज के दौर में किसी भी देश के दूर-दराज के कोने में बैठे व्यक्ति के लिए इंटरनेट का इस्तेमाल कर कहीं भी, किसी भी इंसान तक अपनी बात पहुँचाना बहुत आसान है। बस ज़रूरत है तो आपके पास इंटरनेट की सुविधा उपलब्ध होने और आपको उसके बारे में मूलभूत जानकारी होने की। इस दिवस का महत्व दिव्यांग-जनों के लिए और भी अधिक है, अतः इसका उद्देश्य उन लोगों के लिए डिजिटल मीडिया (जिसमें वेब, सॉफ्टवेयर और मोबाइल आदि शामिल हैं)  को सुलभ, सरल बनाना, उनको इसका आदी बनाना और सीखने के लिए प्रेरित करना है। इसका उद्देश्य ख़ासतौर पर उत्पादों और सेवाओं को इस तरह से डिजाइन करना है, जिससे कोई भी व्यक्ति (चाहे वो दिव्यांग हो अथवा सक्षम) बिना अपनी कमी का अहसास किए उत्पादों और सेवाओं का इस्तेमाल कर सके।   वैश्विक सुगम्यता जागरूकता दिवस, जिसे इस साल 18 मई को मनाया जाना है, का उद्देश्य यही है।

सुगम्यता अथवा अभिगम्यता या सुलभता और उपलब्धता एक ऐसा मानवाधिकार है, जिसे डिजाइन करते समय सभी को एक समान मानने की शर्त को अवश्य माना जाना चाहिए। यदि आप किसी सुविधा की उपलब्धता को डिजाइन करने में किसी तरह की कमी रखते हैं, तो आप उसके उपयोगकर्ता के सबसे बेहतर अनुभव की अपेक्षा भी नही कर सकते। किसी भी तरह की मानवीय अक्षमता के प्रति मानव का संवेदनशील होना, किसी भी उत्पाद अथवा सेवा को डिजाइन करते समय एक कुशलता बनती है, और यदि इसका अभ्यास पूरी सक्रियता के साथ किया जाता है, किसी के लिए भी दुर्गमता एक ग़ुज़रे ज़माने की बात बन जाती है।

अब हम बात करते हैं, सन 2012 में डॉन नॉर्मन द्वारा किए गए उस पोस्ट की जिसने इस दिवस की नींव डाल दी। डॉन नॉर्मन ने अपने विचारों को व्यक्त करते हुए इस संबंध में लिखा थाः

"जब हम कुछ ऐसा डिजाइन करते हैं जिसका उपयोग विकलांग लोग कर सकते हैं, तो हम इसे सभी के लिए बेहतर बनाते हैं।" - डॉन नॉर्मन

इस दिवस का एक मात्र लक्ष्य सुगम्यता पर निर्भर करता है। हमें इस सोच के साथ आगे बढ़ना है कि हमारी हमारे जो भी विकास, अनुसंधान आदि हो, उन सभी को विकसित करते अथवा तैयार करते समय यह ध्यान रखा जाए कि हम कोई भी व्यक्ति मात्र इसलिए उसकी पहुँच से बाहर न हो कि वह किसी तरह की शारीरिक अक्षमता का शिकार है। इस संबंध में, चाहे एक डेवलेपर हो, अथवा डिज़ानर या उपयोगकर्ता ही क्यो न हो, हमारी सोच सदैव यह होनी चाहिए कि हम सब तक बिना किसी बाधा के पहुँच संभव हो। यदि हम ऐसा करने में सफ़ल होते हैं तो हमे एक ऐसे भविष्य की ओर बढ़ने से कोई रोक नही सकता जहां पर सभी समान हो।

इस ओर बढ़ते हुए आपको एक अपने उत्पादों चाहे आप उनके निर्माता हैं, अथवा उपयोगकर्ता, की अभिगम्यता (सब तक पहुँच) के आधार पर आंकलन करते रहने का दृष्टिकोण अपनाना होगा। आज के दौर में ऐसे बहुत से मुफ़्त ऑनलाइन संसाधन उपलब्ध हैं, जो आपकी पहुँच क्षमता का मूल्यांकन करने में मदद कर सकते हैं।

इस दिशा में डब्लू.ए.आई (वेब एक्सेसिबलिटी इनिशिएटिव) वर्ल्ड वाइड वेब कसोर्टियम (W3C ®) का हिस्सा है। W3C की सन 1994 में शुरूआत की गई थी। इसे शुरू करने का उद्देश्य उन सामान्य प्रोटोकॉल को बढ़ावा देना था, जो वर्ल्ड वाइब वेब के विकास बढ़ावा देते हैं, इसकी इंटरऑपरेटिबिलिटी को सुनिश्चित करते हैं। W3C वेब तकनीक का ऐसा मानक है, जिसे वैश्विक तौर पर मान्यता प्राप्त है, जबकि WAI को ऐसी मान्यता वेब एक्सेसिबिलिटी के लिए प्राप्त है।

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